Wednesday, June 20, 2007

बाज़ार में बिकने के लिए तैयार ब्लाग-1

सवाल उठता है कि ब्लाग को बाजार में बेचा कैसे जाए। क्या प्रचार की बाट जोही जाए। कि गूगल के जरिए ये इंतजार किया जाए कि वो कमाए तो हम पाएं। आज जितने भी जनसंचार माध्यम है वे अपनी कमाई के लिए बाजार के प्रचार पर पूरी तौर पर निर्भर है। और जो सीमित जनसंचार के माध्यम है, जैसे सामुदायिक रेडियो, वे केवल स्वांतह सुखाय जन हिताय से गुजारा करते है। देखा जाए तो उद्देश्य दोनों के पास है। जनसंचार के बड़े माध्यम, अखबार, रेडियो और टीवी रोजमर्रा के लिए जो पैदा करते है, उनका जीवन चलाने में जो योगदान है, वहीं सामुदायिक माध्यम का छोटे इलाकों में अनाज, पशु व्यापार और मौसम में है। तो ब्लाग का उपयोग किस लिए है। जरा खुद से पूछिए कि आप क्यों चला रहे है ब्लाग।

जबाव आते ही आपको पता लगेगा कि आप किसी व्यवसाय के लिए ये जद्दोजहद कर ही नहीं रहे है। इसीलिए इसे कैसे बेचा जाए, ये आपको पता ही नहीं है। हां देखादेखी में आपने भी गूगल और अन्य प्रचार स्रोत लगा रखें है। आज हिंदी में ऐसे कई ब्लाग है, जो रोजाना सैकड़ों हिट पाते है। लेकिन बाजार इन सूचकांको को तव्वजों नहीं दे रहा। क्यों।

वजह है अनियंत्रित विकास। तकनीकी और बाजार में बिकने वाले उत्पादों से दूरी। और सबसे बड़ी नैतिक दिक्कत है भाषा की क्लिष्टता औऱ दुरूहता। एक एक करके आता हूं।


क्या आपने ऐसा कोई ब्लाग देखा है, जिसे आप अनोखा या विशेष कह सकें। मैं जानता हूं कि आप कहेंगे, कई है। लेकिन समझे। कविता, कहानी, किस्से,. रचनाए और तरह तरह की लेखनी को कैसे बाजार मिल सकते है, जब इस देश में हिंदी साहित्य को स्वांतह सुखाय के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है। ब्लाग में कंटेंट क्या हो। ये तय करने से पहले ये जाने कि क्या जरूरत है आपके आसपास। आप खुद के सुख और दुख के लिए जो चाहे रचें, लेकिन बेचने के लिए चुना गया विषय ऐसा हो जिसमें आपकी रूचि कम, खरीदार की ज्यादा हो। जैसे आपके मुहल्ले में बिजली जाती रहती है। तो क्यों न आप एक स्थानीय इनवर्टर कंपनी से बात करके उसके उत्पाद के लिए और देश को बताने के लिए लिखें। ये एडवर्टोरियल जैसा होगा। लेकिन आप कहेंगे कि ये तो दलाली जैसा है। मैं विस्तार से बताता हूं।

देश में बिजली बड़ी समस्या है। और इसके लिए गैर परंपरागत ऊर्जा सोत्रो पर निर्भरता की बात बार बार कही जाती है। आपने क्या किसी को ये बताया है कि इस नान कंवेंनशनल उर्जा के फायदे औऱ नुकसान क्या क्या है। और क्या आपने ये सोचा है कि आप केवल इस विषय पर अगर एक महीने तक लिखते रहे और फिऱ इस और किसी सरकारी या निजी कंपनी ने ध्यान दिया, तो वो आपको अपना प्रचारक मान सकती है। और फिर आप उनके लिए एक ब्लाग चला सकते है। कंपनियों की वेबसाइटें होती है। लेकिन आपके ब्लाग की लोकप्रियता औऱ आपकी सस्ती प्रस्तुति किसी भी छोटे निवेश को आकर्षित कर सकता है।

ये सारे प्रयोग उन सभी विषयों पर किए जा सकते है, जो आपके आस पास से जुड़े है। केवल ध्यान इतना रखना होगा कि आपको पढने वाले लोकल लोग ज्यादा हो। इसके लिए सीधा सा जरिया है लोकल प्रचार। आप किसी भी दिन किसी अखबार में ढ़ाई सौ रूपए खर्च करके अपने ब्लाग को सौ पचास लोगों में पहुंचा सकते है। बाकी काम आपके ब्लाग पर मौजूद सामग्री और वर्ड आफ माउथ से हो जाएगा।

आगे आने वाले दिनों में मैं कोशिश करूंगा कि आपको तथ्यो से अवगत करा सकूं। आपके सुझाव और सलाह इस हिंदी ब्लाग जगत को उत्पादक और उर्वरा बना सकते है। सो जारी रहिए। एक सूचनात्मक ब्लाग के साथ।

5 comments:

Rajesh Roshan said...

वैसे बड़ी अच्छी जानकारी दी है आपने। धन्यवाद । वैसे प्राप्त जानकारी के अनुसार अविनाश के मोहल्ला को कुछ ऑफर मिले हैं । लगता है कुछ करना पड़ेगा ।

:)

Sanjeet Tripathi said...

जे हुई ना बात!!
शुक्रिया!!

Sanjeeva Tiwari said...

सराहनीय कार्य साधुवाद

अनूप शुक्ल said...

बहुत अच्छी जानकारी!

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

अरे ये तो बहुत बढ़िया बात बताई. ट्राई करेंगे. चार पैसे किसे बुरे लगते हैं. कमसे कम इन्टरनेट का खरचा तो निकले!

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