मुझे जिंदा रहना है
मुझे नौकरी करनी है।
एक बार किसी बात में
मां ने कहा कि जीवन में ऐसा
करना जो नाम रोशन करने जैसा हो
मैने छोड़ दी एक चैन की सरकारी नौकरी
और
अब हूं एक मोर्चे पर।
मैं सैनिक नहीं हूं।
होता तो घरवाले हर हादसे पर सिहर जाते
पत्नी और बच्चे एक आम सी जिंदगी में बिसर जाते
मैं अधिकारी भी नहीं।
होता तो घूसखोर होकर सो जाता
देश का खाकर परिवार को भागी बनाता
मैं नेता भी नहीं
होता तो सफेदी से कालिख छुपाता
रोजाना वादों से दुनिया को बहलाता
मैं अभिनेता भी नहीं
रोज एक किरदार में जीता
रोज एक किरदार को सीता
लेकिन रहता बिना भाव के
होता किसी के लिए राह का कांटा
मैं वैज्ञानिक भी नहीं
सोचता और बनाता देश के लिए
लेकिन मेरी अहमियत खुद के लिए
केवल एक सामान्य समर्पित गुमनाम
शख्स की होती, मैं खुश न होता।
मैं क्या हूं।
मैं क्यों हूं।
मैं कैसा हूं।
पर जानते है मैं खुश हूं।
मैं एक पत्रकार हूं।
जो, सबके लिए सोता जागता है
जो, आपकी चिंता को अपना बनाता है
जो, सबसे आपके लिए लड़ने को तैयार है
जो, नाम से शुरू होकर काम में खो जाता है
रोजाना, खास होकर मैं अब भी आम हूं।
मैं पत्रकार हूं।
Friday, June 8, 2007
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1 comments:
rachna kaafi acchi lagi ,very very very good
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