Sunday, August 17, 2008

हे भारतमाता!

हे भारतमाता।
अजर, अमर, अटल देश हो, हे भाग्यविधाता
खिले हर कोख में एक दूर दृष्टिदाता
प्रेम, माधुर्य, भाईचारे बनी रहे ये अविरल गाथा
हे भारत माता हे भारत माता।

बनी पड़ी मिसाल है, अखंड कथा निहाल है।
धरा पर बिखरा तेज है, ये संस्कृति की सेज है।
नदी की धार सार है, यहां भूमि आधार है।
हर नजर में स्वप्न है, कर्म यहां धर्म है।
हर बात में दर्शन है, हर साथ में समर्पण है।
हर ओर छाया उजाला है, हर पंथ यहां निराला है।

आशाओं के विस्तार में व्यक्ति की पहचान है।
इस देश की बात में हर अर्थ बस महान है।
जन मन गण, भारत भाग्य विधाता
हे भारत माता, हे भारत माता।

एक राह का सफर, चल रहे कई डगर।
एक चाह का नगर, खोज रहे सभी मगर।
एक धर्म का चौराहा, हर किसी के लिए दोराहा।
एक जीवन का सत्य, न मिले तो लगे सूर्य अस्त।
एक सच का रहे भान, देश के साथ मिलें है प्राण।

एक भूमिका रहे हमेशा, छोड़ जाएं कुछ अनोखा।
दो इस बात का वरदान, रहे हमें देशभक्ति का भान।

हे भारत माता। हे भारत माता। हे भारत माता।

1 comments:

Ruth said...

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