हमारा माहौल हमें प्रभावित करता है। आज की दुनिया में काम करना हर दिन एक चुनौती है। एक लम्बे समय से हम ये जानते हैं कि अनुशासन और नियम से जीने के फायदे है। लेकिन शरीर की थकान और मानसिक बोझ के बाद अगला दिन नया महसूस करना हमारे लिए मुश्किल सा होता है।
मुझे बीते सालों में ये बात महसूस हुई कि अगर आप समय से नहीं जगते और सोते है तो इसका थोड़ा प्रभाव आपकी उत्पादकता पर पड़ता है। मसलन शरीर में बने रहने वाले दर्द को दूर करने के लिए आपका बार बार चाय, काफी और सिगरेट पीना। और इनमें बर्बाद होना वाला वक्त और स्वास्थ्य।
तो कैसे आपका पूरा दिन हरा भरा रहे। न दर्द हो, न चिंता।
शरीर श्वास से चलता है। और श्वास लेने की गति आपकी सारी प्रक्रियाओं को बदलती है। हम दिन भर में कभी कभी ही श्वास को शरीर के अंदर जाते और बाहर आते महसूस करते है। और इसी समय आप देख सकते है कि आप तेज सांस लेते है या धीरे। लेकिन इससे क्या। इससे बहुत कुछ। आर्ट आप लिंविंग हो या भी रिजुनवेशन प्रासेस, सभी सांस की गति से जुड़ी है। और प्राणायाम के जिस भी प्रभाव को आप सुनते है, वो सब श्वास की गति से जुड़ी है।
रोजाना आफिस में हम मानसिक तौर पर एक युद्ध सा लड़ते है। हम जूझते है, दौड़ते है, खंगालते है और फिर किसी जानकारी को एक सूचना में तब्दील करते है। दिन भर इस प्रक्रिया के बाद एक थके दिमाग को आराम देत है। और ज्यादातर आपका दिमाग रात में भी दौड़ता रहता है। नतीजा अगले दिन की सुबह थकान भरी होती है। और इसके आगे पूरा दिन आपका इंतजार करता है।
हमें एक बात का खास ध्यान रखना है। सोने और जगने के लिए बनाए गए आपके नियम ज्यादातर गलत होते है। या तो आप दस से छह वाले पैटर्न पर सोते है या तो छह-आठ घण्टे वाले। इससे जुड़ा एक लेख पाया। रोचक लगा।
ये छोटे छोटे तरीके आपके रोजाना के जीवन में भारी बदवाल ला सकते है। आजमा कर देखिए।
- आफिस आने के समय के हिसाब से जगना छोड़कर, एक निश्चित समय जगे।
- इस समय का पूरा उपयोग करें। न सोचे कि आफिस जाना है तो पहले मेहनत नहीं करना।
- अपनी सामाजिक गतिविधि का दायरा बढ़ाते रहें।
- आपकी रचनात्मकता के लिए रोजाना नया जानना जरूरी है।
- पढ़े, खुद के लिए लिखे और रोजाना बोलचाल के लिए आपसी संवाद जरूर करें।
- संवाद से नई जानकारियों को बांटने में लगे रहे।
- हंसने से ऊर्जा बढती है, तनाव दूर होता है। सो किसी तरह भी खुश रहें।
- मन को हल्का करने के लिए ब्रेक जरूर लें। ये चार घण्टे में पन्द्रह मिनट का हो सकता है।
आपको सदैव ऊर्जाविंत रहने के लिए दिमाग का चुस्त रहना और शरीर का दुरूस्त रहना जरूरी है। आफिस में आप इस तरह रह सकते है वेल एंड फिट।
- श्वास लम्बी और गहरी लें। ध्यान रखें हर श्वास में आक्सीजन शरीर के अंदर जाता है, जो माइटोकांड्रिया में जलकर ऊर्जा बनाता है और इससे जलने में रिलीज होती है कार्बन डाईआक्साइड। यहीं ऊर्जा ज्यादा बनेगी, तो आप रहेंगे ज्यादा एनर्जेटिक।
- काम के बीच बीच में शरीर के अंगों में हरकत देते रहें। मसलन, हाथ बांधकर आगे पीछे करना, पैरों को झटका देना, गले को गोल गोल घुमाना और लम्बी सांसे लेना।
- पानी पीने से केवल प्यास नहीं बुझती है। ये अपने आप में एनर्जी जेनेरेटर है। हर आधे धण्टे पर दो गिलास पानी जरूर पिएं। ये प्यास नहीं शरीर की जरूरत है। एसी में प्यास नहीं लगती, लेकिन ये आदत घर से शुरू करें।
- दो घण्टे पर एक बार पानी से मुंह जरूर धुलें। ये आपकी आंखों और चेहरे पर दिखने वाली थकान को दूर करता है।
- मुंह धुलते समय मुंह में पानी भरकर आंखों पर छींटे मारे। इससे आपकी आंखों की रोशनी और दर्द गायब हो जाएगा।
- ताजी हवा का कोई विकल्प नहीं। इसलिए एक दो बार उसे टहलते हुए लेना आपके लिए लाभदायी होगा।
- कुर्सी पर बैठते वक्त अपनी कमर को सीधी ही रखें। ये पोजीशन ही आपकी कमर और रीढ़ की हड्डी का भविष्य तय करती है।
- आंखे झपकाना न भूलें। जितनी बार आप आंख को बंद करते है आंखों में पानी की एक परत उसे धो धेती है।
- जब भी खड़े हो, सीधे रहे, पैरों में फासला रहे और हाथ बंधे न हो। शरीर में खून के प्रवाह को बराबर करने के लिए ये जरूरी है।
- कम्प्यूटर पर काम करने के लिए एक सादा चश्मा बनवाएं। बिना पावर का। इससे आपकी आंखो में दर्द कम होगा।
- हेडफोन का लम्बा इस्तेमाल कान की सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है। कानों पर इसे लगाते समय थोड़ा कानों को थोड़ा खुला रहने दें।
- मशीनें विकिरण छोड़ती है, सो खाली समय में थोडी दूरी जरूरी है।
- मोबाइल को शरीर से दूर ही रखें। आप इसे अपने सामने रख सकते है।
- मोबाइल पर हेडफोन से बात करें। कम नुकसान होगा।
ऐसे बहत से तरीके है जिनसे हम अपने आस पास के माहौल और खुद को बदल सकते है। ये कुछ थे। अपने आस पास का हरियाली को अगर हम खुद में महसूस करते है तो हम हमेशा तरोताजा रहते है। और इसके लिए केवल थोड़ी सतर्कता और ध्यान ही चाहिए होता है।
भव्य
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